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Thursday, December 6, 2012

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कुछ लोगो को तो मेने देखा सड़क के किनारे , भीड़ में किनारे , अलग ही झुके मिलते हे
कोई गर्दन टेडी किये , कोई गर्दन जुकाए , चुप चाप जेसे किसी गहन सोच चिंतन में हो
लोगो को देखते हे फिर अपने हाथ गोद में , चिंताग्रस्त

कुछ के पास में गया भी उनके पास अपने मोबाइल फ़ोन थे
कुछ लम्बी बाते कर रहे मिले
कुछ  सन्देश करते
कुछ नेट पर बिजी
कोई फेस बुक पर हे
कुछ गेम खेल रहे हे
कुछ म्यूजिक सुन रहा हे

चाय की दुकान की ही तरह इन नोजवान लोगो ने मेल ,  नेट, फेस बुक , फ़ोन के पीछे पड़े हे

1 comment:

  1. कभी कभी समझ नहीं आता कि दुनिया के किस कोने में खड़े होकर आप दुनिया को देख रहे हैं... :)

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