Blogvani.com

Wednesday, December 25, 2013

सूर्य का स्वागत करो

हमेसा सुना ही था सूर्य का स्वागत करो
कभी समज  नहीं सकते
अभी तिन दिन सूर्य नहीं उगा बीकानेर में १९, २०, २१ फिर २3 सोमवार को सूर्य उगा तो
याद आया
सूर्य का स्वागत करो
हमने स्वागत किया बिना सूर्य के कुछ भी नहीं कुदरत में 
कुदरत का अनुसासन हे सुब कुछ
इंसान बस कोसिस करता हे
समज से बाहर हे कुदरत
स्वागत करे बड़े दिनों का
हैप्पी क्रिसमिस

Saturday, December 14, 2013


जब भी में कोई  अच्छी प्रेरणादायक  बुक  पढ़ता हु तो एक दम लगता है कि बस अब बस बहुत हुआ
अब कोई चमत्कार होगा
इस बुक के बाद में खुद में कोई परिवर्तन लाने वाला हु.
पर ऐसा कुछ नहीं हुआ
हम जब तक किताब पढ़ते हे . एक अलग ही संसार में होते हे .
उस समय तक ही परिवर्तित होते हे
किताब खत्म होते ही किताब का प्रभाव ख़तम .
जिस प्रकार नई क्लास में आते ही स्टूडेंट टाइम टेबल बनाता हे
फिर कल कल करते हुआ साल ख़तम . 

हम इतने आलसी होते हे कि कोई अच्छा परिवर्तन नहीं कर पाते .
परिवर्तन का गेट अंदर से बाहर खुलता हे
यानि हम ही को वो पहल करनी होगी


Sunday, March 10, 2013

नार्निया फिल्म में बताया था
की नार्निया में २४ दिसम्बर ही था वह २५  दिसम्बर नहीं आया और बरफ जमी रही
बाद में २५  दिसम्बर आया और हैप्पी क्रिशमिश  आया
तब वहा के लोग खुश हो गए
बर्फ पिगली खुशिया आयी


सचमुच सर्दी में हम नार्निया लैंड की तरह जम जाते हे
हमारी दिनचर्या भी कम होती हे
लेट उठना , जल्दी घर जाना , कम से कम घूमना , दुबके रहना
आलस्य करना आदि 
हमारे यहाँ मकर संकान्त्री से सर्दिया जाती हे

फिर बसंत पंचमी फिर धीरे धीरे सर्दिया जाती हे
फिर से सब हम और प्रकर्ति एक्टिव मोड पर होते हे

एक विशेष बात कही मिली
व्यक्तियों की बजाय विचारों की प्रसंशा करना ज्यादा सेफ हे 
कृप्या इस पर सोचे

Saturday, January 26, 2013


 काफी दिनों से सोच रहा हु ज्ञान के बारे लिखू
ज्ञ  से ज्ञानी बचपन से पढ़ते रहे हे
हमेशा लोगो को ज्ञान बाटते ही देखा
अभी अभी एक गाड़ी के पीछे लिखा पढ़ा
ज्ञान नहीं सहयोग दे

सचमुच जिसको जैसा मंच मिला उसने ज्ञान झाडा , ज्ञान के कुरले  किये , ज्ञान का पीक थूका
क्या वो खुद  जो बोला उस पर खुद अमल किया ?

और तो और जिसको ज्ञान मिला और वो लायक नहीं उसने तो उसको तोड़ मरोड़ दिया
तो हम भी ज्ञान बाँटने की मुद्रा , बाबाजी टाइप मुद्रा ख़तम करे
जिसको ज्ञान होता हे वो और भी विन्रम मिलता हे
थोडा व्यावहारिक बने , सहज बने , कुदरती बने, प्राकर्तिक बने 
हालाँकि ये भी ज्ञान सुरु हो गया पर में भी तो सामान्य इन्सान हु आदते जाते जाते जाएगी