बाबाजी की बिल्ली
एक घर में शादी थी घर के बुजुर्ग ने देखा की एक बिल्ली घर में घूम रही थी
कभी वो दूध पीती कभी कुछ खाने की चीज़ में मुह डालती तो बुजुर्ग ने कहा एक डोरी लाकर दो पहले बिल्ली बांध लो फिर मंगल कार्य करना
फिर बिल्ली बंधी फिर शादी हुई
शादी के कुछ दिनों के बाद बुजुर्ग चले गए
घर में कई साल बाद फिर शादी हुई तो लिस्ट बनी सामान क्या क्या चाहिए
किसी ने टोका अरे बाबाजी सभी मंगल कार्य से पहले एक बिल्ली बांधते थे
सब ने हा भरी
कही से बिल्ली लाकर बांधी गयी तब उस घर में शादी हुई
तब से अब तक उस घर में शादी से पहले बाबाजी की बिल्ली बंधती हे
ये कहानी हमे परम्परा के बारे बताती हे
एक बार जाने अनजाने में सुविधा के हिसाब से किये गए कार्य हम लगातार करते जाते हे
फिर धीरे धीरे वे पहले वे आदत बनते हे फिर वे एतिहासिक होते जाते हे रिवाज और परंपरा बन जाते हे
एक घर में शादी थी घर के बुजुर्ग ने देखा की एक बिल्ली घर में घूम रही थी
कभी वो दूध पीती कभी कुछ खाने की चीज़ में मुह डालती तो बुजुर्ग ने कहा एक डोरी लाकर दो पहले बिल्ली बांध लो फिर मंगल कार्य करना
फिर बिल्ली बंधी फिर शादी हुई
शादी के कुछ दिनों के बाद बुजुर्ग चले गए
घर में कई साल बाद फिर शादी हुई तो लिस्ट बनी सामान क्या क्या चाहिए
किसी ने टोका अरे बाबाजी सभी मंगल कार्य से पहले एक बिल्ली बांधते थे
सब ने हा भरी
कही से बिल्ली लाकर बांधी गयी तब उस घर में शादी हुई
तब से अब तक उस घर में शादी से पहले बाबाजी की बिल्ली बंधती हे
ये कहानी हमे परम्परा के बारे बताती हे
एक बार जाने अनजाने में सुविधा के हिसाब से किये गए कार्य हम लगातार करते जाते हे
फिर धीरे धीरे वे पहले वे आदत बनते हे फिर वे एतिहासिक होते जाते हे रिवाज और परंपरा बन जाते हे

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