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Thursday, December 27, 2012

पहला सुख निरोगी काया

एक पुरानी किन्तु यथार्थ बात हे की पहला सुख हे निरोगी काया
इसके बारे में अब व्याख्या करने की कोई जरुरत मुजको नहीं लगती

जरुरत हे नए साल में हम को उन उपायों के बारे में गहनता से विचार करने की जो हमे अपनाने हे

हम सब  को अपने अपने शारीर की तासीर यानि प्रकर्ति मालूम हे
हम सब  को पता हे कोन  से सरल उपचार और उपाय से हम ठीक रह सकते हे पर नहीं करते
कारन हे सायद हमारा आलस्य ( में अपने बारे में तो कह ही सकता हु )

आलस्य ही होगा
 नहीं तो लगभग हर व्यक्ति अपने हिसाब से कुछ न कुछ प्लान करता हे

कोई योग , कोई कसरत, कोई जोगिंग , कोई मोर्निंग वाक, कोई होमियोपैथी , कोई और्वदिक नुश्खे अपने हिसाब से अपनाते हे .

नए साल में हम स्वास्थ्य के लिए आलस्य का त्याग कर लेते हे

इतना तो कर ही सकते हे .

पहले आप स्वस्थ होंगे तो कुछ अच्छे काम आप कर सकते हे फिर सामाजिक  स्वास्थ्य की बात होगी।

तो नया साल मुबारक हो
अब ये मत कहना की ये हमारा वाला नया साल नहीं हे वो बाद में आएगा
हर त्यौहार को ख़ुशी मनाना एक अच्छा आईडिया हे

HAPPY NEW YEAR


Sunday, December 16, 2012

बाबाजी की बिल्ली

एक घर में शादी थी घर के बुजुर्ग ने देखा की एक बिल्ली घर में घूम रही थी
कभी वो दूध पीती कभी कुछ खाने की चीज़ में मुह डालती तो बुजुर्ग ने  कहा एक डोरी लाकर दो पहले बिल्ली बांध लो फिर मंगल कार्य करना
फिर बिल्ली बंधी फिर शादी हुई
शादी के कुछ दिनों के बाद बुजुर्ग चले गए

घर में कई साल बाद फिर शादी हुई तो लिस्ट बनी सामान क्या क्या चाहिए
किसी ने टोका अरे बाबाजी  सभी मंगल कार्य से पहले एक बिल्ली बांधते  थे
सब ने हा भरी
कही से बिल्ली लाकर बांधी गयी तब उस घर में शादी हुई
तब से अब तक उस घर में शादी से पहले बाबाजी की बिल्ली बंधती हे

ये कहानी हमे  परम्परा के बारे बताती हे
एक बार जाने अनजाने में सुविधा के हिसाब से किये गए कार्य हम लगातार करते जाते हे
फिर धीरे धीरे वे पहले वे आदत बनते हे फिर वे एतिहासिक होते  जाते हे  रिवाज और परंपरा  बन जाते हे

Thursday, December 6, 2012

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कुछ लोगो को तो मेने देखा सड़क के किनारे , भीड़ में किनारे , अलग ही झुके मिलते हे
कोई गर्दन टेडी किये , कोई गर्दन जुकाए , चुप चाप जेसे किसी गहन सोच चिंतन में हो
लोगो को देखते हे फिर अपने हाथ गोद में , चिंताग्रस्त

कुछ के पास में गया भी उनके पास अपने मोबाइल फ़ोन थे
कुछ लम्बी बाते कर रहे मिले
कुछ  सन्देश करते
कुछ नेट पर बिजी
कोई फेस बुक पर हे
कुछ गेम खेल रहे हे
कुछ म्यूजिक सुन रहा हे

चाय की दुकान की ही तरह इन नोजवान लोगो ने मेल ,  नेट, फेस बुक , फ़ोन के पीछे पड़े हे

Saturday, November 24, 2012

एक लम्बे समय बाद ब्लॉग लिख रहा हु पहले तो मोसम की जानकारी
नारियल तेल जम रहा हे सर्दिया आ रही हे

मुझे कई बार चाय की दुकानों में जाने का मोका मिलता हे
लोग घंटो तक बाते करते ही रहते हे पता नहीं कितनी बाते करते हे
अगले दिन फिर वही अकाउंट सर्विसेज के चार लोग , एक तरफ प्रॉपर्टी डीलर के दो लोग,
एक तरफ दो मास्टर जी, चाय और गपपे ,

अलग अलग गुट में , और येही लोग मुजको हर बार दिख जाते
कुछ की तो जगह भी फिक्स हे कोण किस कोने में होगा
कुछ का तो समय भी फिक्स
जयादातर चाय का इंतजार , लम्बी ख़ामोशी , बजता हुआ fm radio ,
चाय की दुकान में अक्सर एक से लोगो की भीड़ लगी रहती हे
जयादा उतावले लोग तो चाय बनने के पुरे प्रोसेस को देखने चाय के भगोने तक खड़े हो जाते हे

यहाँ फिल्म से छोटी मोटी राजनातिक चर्चा होती भी हे
सेष फिर कभी

Saturday, June 16, 2012

ART OF LIVING

IN BIKANER ON 1 MAY TO 6TH MAY there was mega basic course of ART OF LIVING.

a beautiful course special . i will not describe all thing because if you simply interest in YOGA, PRANAYAMA, DHYAN, BHAJANS , AND SATSANGA  then you should go.

It is possible that there are many other courses like this but i have attended first and UNIK course of this type.
so go and join the ART OF LIVING  .

Saturday, February 18, 2012

नारियल का तेल अभी तक पिघला नहीं

इस बार तो सर्दी काफी लम्बी अवधि की पड़ी हे मेरा लाया नारियल का तेल अभी तक पिघला नहीं हे रोज धुप में रखना पड़ता हे
मुजको याद हे २६ जनवारी को गर्मी की तपन महसूस होती जब स्कूल में धुप में होते थे 
देश में राजनीती उथल पुथल चल रही हे ये बाते चाय के समय अछी लगती हे  चाय से याद आया 
टाटा चाय का विज्ञापन बड़ा अच्छा लगता हे देश  उबल रहा हे तभी तो रंग आएगा आएगा जोश 
वेसे अभी का समय खुद के विकास के लिए ठीक हे सुचना और संचार और तकनीक बस एक किल्क 

 तो इस निरासजनक राजनीती के दौर में हम सब को अपना विकास अवस्य करना चाहिए 
इस ब्लॉग के जरिया हम क्यों किसी की राजनीती बुराई करे .

बाल साहित्य


बच्चो की दुनिया में  बाल साहित्य का बड़ा ही महत्व हे छोटी कहानी , कविता बाल मन पर बड़ा गहरा प्रभाव डालती हे .
twinkle twinkle little star  हो या pusy cat या jingal bell या humpy dumpy .
सारी कविता अमर हो गयी
कहानियो की ज्यादातर  सुरुवात रात की नींद को लेकर  ही हे .
नानी दादी जब नींद नहीं आती तो कहानियो की सुरुवात कर देती हे
एक था राजा या बहुत पुराणी बात हे
या राजा के सात रानी या सात बेटे  कुल मिलकर कहानी लम्बी हो या कहानी के पत्र ज्यादा  हो ताकि रात गुजर सके नाती पोते पूरी कहानी कई महीनो तक सुनता .
arabian nights  की कहानी में भी सुल्तान को नींद नहीं आती तो एक औरत उसको कहानिया सुनाती.
अरब में लम्बी रातो में ही सिंदबाद , अलीबाबा की कहानिया रची गयी.
भारत  में राजकुमारों को ज्ञान देने के लिए पंचतंत्र और हितोप्रदेश की रचना की गयी.
भारतीय  बाल साहित्यों में जानवरों को पहली बार बोलते हुए बताया गया.
युरोपे में तब परियो की कहानियो का दौर  चला तब syandralla , seven drawf , में  गरीब पात्र आ गए
ग्रीम बंधू (greem brothers) ने परी कथा में खूब  लिखा
एक कहानी तो आप को याद होगी जब राजा बिना कपड़ो के  गुमता हे एक बच्चा सच कह देता हे
रूस में भी सुंदर बाल साहित्य रचा गया राजकुमार यिवान और मेंडक राजकुमारी आदि






 शेष फिर कभी