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Saturday, November 24, 2012

एक लम्बे समय बाद ब्लॉग लिख रहा हु पहले तो मोसम की जानकारी
नारियल तेल जम रहा हे सर्दिया आ रही हे

मुझे कई बार चाय की दुकानों में जाने का मोका मिलता हे
लोग घंटो तक बाते करते ही रहते हे पता नहीं कितनी बाते करते हे
अगले दिन फिर वही अकाउंट सर्विसेज के चार लोग , एक तरफ प्रॉपर्टी डीलर के दो लोग,
एक तरफ दो मास्टर जी, चाय और गपपे ,

अलग अलग गुट में , और येही लोग मुजको हर बार दिख जाते
कुछ की तो जगह भी फिक्स हे कोण किस कोने में होगा
कुछ का तो समय भी फिक्स
जयादातर चाय का इंतजार , लम्बी ख़ामोशी , बजता हुआ fm radio ,
चाय की दुकान में अक्सर एक से लोगो की भीड़ लगी रहती हे
जयादा उतावले लोग तो चाय बनने के पुरे प्रोसेस को देखने चाय के भगोने तक खड़े हो जाते हे

यहाँ फिल्म से छोटी मोटी राजनातिक चर्चा होती भी हे
सेष फिर कभी

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