नव वर्ष की सुभकामनाय
कुदरत भी नए साल स्वागत में पुराने सारे पत्ते पेड़ से गिरा हे और नए नए पते हरे हरे कोपल की तैयारी करती हे। चैत्र के १५ दिन के बाद जब अमावस्या के बाद प्रथम दिन से न्य साल मना लिया जाता हे।
महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा , कर्नाटक में इसे उगादी , सिंधी में इसे चेटी चन्द , नव सम्वत्सर माना गया हे।
कुदरत इसकी सुरुवात गर्मी से करती हे।
कुदरत भी नए साल स्वागत में पुराने सारे पत्ते पेड़ से गिरा हे और नए नए पते हरे हरे कोपल की तैयारी करती हे। चैत्र के १५ दिन के बाद जब अमावस्या के बाद प्रथम दिन से न्य साल मना लिया जाता हे।
महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा , कर्नाटक में इसे उगादी , सिंधी में इसे चेटी चन्द , नव सम्वत्सर माना गया हे।
कुदरत इसकी सुरुवात गर्मी से करती हे।
