काफी दिनों से सोच रहा हु ज्ञान के बारे लिखू
ज्ञ से ज्ञानी बचपन से पढ़ते रहे हे
हमेशा लोगो को ज्ञान बाटते ही देखा
अभी अभी एक गाड़ी के पीछे लिखा पढ़ा
ज्ञान नहीं सहयोग दे
सचमुच जिसको जैसा मंच मिला उसने ज्ञान झाडा , ज्ञान के कुरले किये , ज्ञान का पीक थूका
क्या वो खुद जो बोला उस पर खुद अमल किया ?
और तो और जिसको ज्ञान मिला और वो लायक नहीं उसने तो उसको तोड़ मरोड़ दिया
तो हम भी ज्ञान बाँटने की मुद्रा , बाबाजी टाइप मुद्रा ख़तम करे
जिसको ज्ञान होता हे वो और भी विन्रम मिलता हे
थोडा व्यावहारिक बने , सहज बने , कुदरती बने, प्राकर्तिक बने
हालाँकि ये भी ज्ञान सुरु हो गया पर में भी तो सामान्य इन्सान हु आदते जाते जाते जाएगी

No comments:
Post a Comment