जब भी में कोई अच्छी प्रेरणादायक बुक पढ़ता हु तो एक दम लगता है कि बस अब बस बहुत हुआ
अब कोई चमत्कार होगा
इस बुक के बाद में खुद में कोई परिवर्तन लाने वाला हु.
पर ऐसा कुछ नहीं हुआ
हम जब तक किताब पढ़ते हे . एक अलग ही संसार में होते हे .
उस समय तक ही परिवर्तित होते हे
किताब खत्म होते ही किताब का प्रभाव ख़तम .
जिस प्रकार नई क्लास में आते ही स्टूडेंट टाइम टेबल बनाता हे
फिर कल कल करते हुआ साल ख़तम .
हम इतने आलसी होते हे कि कोई अच्छा परिवर्तन नहीं कर पाते .
परिवर्तन का गेट अंदर से बाहर खुलता हे
यानि हम ही को वो पहल करनी होगी

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